मध्यान भोजन बंद होने के कगार पर।

मध्यान भोजन बंद होने के कगार पर। 

 मध्यान भोजन बंद होने के कगार पर, कार्यकर्ताओं को पैसाा नहीं मिलने पर।

    महिला स्वयं सहायता समूह और रसोइयों को तीन माह से नहीं मिला वेतन।
 पैसा नहीं मिला, मध्यान भोजन बंद होने की कगार पर।खाद्य सामग्री उधार लेकर चला रहे हैं समूह अब दुकानदारों में भी हाथ खड़े किए।इस समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है मध्यान भोजन को लेकर। सही समय पर रसोइयों को तीन माह तक वेतन नहीं मिलने पर भोजन बंद होने की कगार पर गया है।
   ग्रामीण इलाकों की स्कूलों में मध्यान भोजन का संचालन महिला सहायक समूह द्वारा किया जाता है। मध्यान भोजन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा राशि प्रदान की जाती है। केंद्र सरकार से राशि देरी से मिलने के कारण राज्य शासन भी आवंटन में यह विलंब करता है।
   इसके चलते महिला स्वयं सहायक समूह पर रसोइयों की समय पर राशि नहीं मिल पाती है।
   केंद्र सरकार की तरफ से 14 दिसंबर को राशि आ चुकी है फिर भी जारी नहीं किया गया है। 
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने 14 दिसंबर को हर हर वर्ष के मध्यान भोजन के चलते पहले किस्तों के रूप में 57 करोड़ रुपए आवंटित कर दिए गए हैं।
   जाने अलग-अलग दिन का मेनू।

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