पहले बॉडीबिल्डिंग में चैंपियन बने , भूजाहीन तीरंदाज शितालदेवी फाइनल में पहुंची।
गदाधर साहू को 14 वर्ष की उम्र में ट्रेन से उतरते वक्त हादसे में उनको मृत घोषित कर दिया गया था। गदाधर साहू को मृत समझ कर उसे मुर्दाघर भी ले गया था। लेकिन डॉक्टरों ने देखा तो उनकी सांसे चल रही थी। उनके पैर को अलग किए जाने पर उनके बाद उनकी जिंदगी बची, पैंर नहीं होने के बावजूद भी वह उड़ीसा गंजम जिले में नरेंद्रपुर में रहने वाले गदाधर ने अपने संघर्ष को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने शरीर को ऐसे ट्रांसफार्मर किया कि लोग देखते रह गए कि उनके पैर नहीं होते हुए भी वहां इतनी बॉडी बिल्डिंग मैं इतने फिट हैं।
वहीं दूसरी तरफ ही भुजाहीन शीतल देवी, अपनी तीरंदाजी में काफी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर दिया है। उनकी तारीफ चारों ओर गूंज रही है लोगों में सिर्फ एक ही नाम है शीतल देवी। शीतल देवी के दोनों हाथ नहीं होते हुए भी वह भारत के लिए सिल्वर मेडल लाने वाली भारत की पहली लड़की है। (https://cgtopnews1.blogspot.com/2023/12/14.html

0 टिप्पणियाँ